दिनांक ०८/०९/२०२६ गर्जा महाराष्ट्र न्यूज लखनऊ,प्रतिनिधि : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में माली, सैनी, कुशवाहा, मौर्य एवं समस्त ओबीसी समाज का विशाल ‘अति पिछड़ा महामेला’ बड़े ही उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा मुंबई के प्रमुख ओबीसी नेता एवं महाराष्ट्र माली समाज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल महाजन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। लगभग 5 से 10 हजार नागरिकों की विशाल उपस्थिति में आयोजित इस सम्मेलन में माली-सैनी समाज की विभिन्न उपजातियों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता बड़ी संख्या में शामिल हुए।

अनिल महाजन की प्रमुख मांगें एवं राजनीतिक चर्चा सम्मेलन को संबोधित करते हुए और अखिलेश यादव के साथ हुई वन-टू-वन बैठक में अनिल महाजन ने ओबीसी समाज के प्रमुख मुद्दों पर अपनी बात प्रखरता से रखी। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में माली, मौर्य और सैनी समाज को उचित राजनीतिक भागीदारी मिलनी चाहिए। आगामी चुनावों में समाजवादी पार्टी को इस समाज के उम्मीदवारों को अधिक से अधिक टिकट देना चाहिए।”

इसके साथ ही उन्होंने संसद में जातीय जनगणना पर आधारित विस्तृत चर्चा कराने और ओबीसी समाज को उनका पूर्ण आरक्षण दिलाने का अनुरोध अखिलेश यादव से किया। महाजन ने आगे कहा, “ओबीसी समाज के युवाओं की शिक्षा के लिए वर्तमान में मिलने वाला सरकारी फंड बहुत कम है। इसलिए युवाओं की बेहतर शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया जाए और देश के प्रत्येक राज्य में ओबीसी छात्रों के लिए छात्रावास (हॉस्टल) की व्यवस्था की जाए। इस मुद्दे को संसद और सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाना चाहिए।”

प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
मुरादाबाद के माली-सैनी समाज के नेता जे.पी. सैनी जी ने इस महासम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप से:
बाबू सिंह कुशवाहा (सांसद, जौनपुर)
दिवेश शाक्य (सांसद, एटा)
नीरज मौर्य (सांसद, आंवला)
रामावतार सैनी (विधायक, नजीबाबाद विधानसभा, बिजनौर)
मिलिंद सैनी (ओबीसी वक्ता, राजस्थान)

इनके अलावा माली, सैनी, शाक्य और मौर्य समाज के सैकड़ों गणमान्य व्यक्ति तथा हजारों समाज बंधु उपस्थित थे। अति पिछड़ा वर्ग के अधिकारों, शिक्षा और सत्ता में भागीदारी के लिए यह महासम्मेलन अत्यंत ऐतिहासिक और दिशादर्शक साबित होगा, ऐसा विश्वास उपस्थित जनसमुदाय द्वारा व्यक्त किया गया।

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